राजश्री मेडिकल रिसर्च इंस्ट्टीयूट में एम.बी.बी.एस. 2025 बैच के नव प्रवेशी छात्र/छात्राओं के प्रथम वर्ष में प्रवेश के अवसर पर व्हाइट कोट समारोह का आयोजन माँ सरस्वती जी के समक्ष संस्थान के चेयरमैन श्री राजेन्द्र अग्रवाल जी ने दीप प्रज्वलित करके किया।

संस्थान के डीन डाॅ॰ वी॰के॰ अग्रवाल ने बताया कि महर्षि चरक एक बड़े आयुर्वेद विशारद थे, जिन्होंने आयुर्वेद के माध्यम से चिकित्सा जगत में क्रांति ला दी थी, इन्होंने ही चरक-संहिता का निर्माण किया था। चरक-शपथ कहती है ‘‘ना अपने लिए और ना ही दुनिया में मौजूद किसी वस्तु या फायदे को पाने के लिए, बल्कि सिर्फ इंसान की पीड़ा को खत्म करने के लिए मैं अपने मरीजों का इलाज करूंगा’’। बैच 2025 सत्र में आए नए छात्र/छात्राओं को वाइट कोट पहनाया गया। वाइट कोट पहनाने के बाद एमबीबीएस के विद्यार्थियों को ‘चरक शपथ’ दिलाई गई।
संस्थान के चेयरमैन श्री राजेन्द्र अग्रवाल ने विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए संस्थान की स्थापना से लेकर आज तक का इतिहास संक्षिप्त रूप में बताया, उन्होनें इस अवसर पर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वाइट कोट डॉक्टर्स की पहचान होती है, उन्होंने कहा कि डॉक्टर बनना सिर्फ हमारा सपना नहीं होता बल्कि हमारे माता-पिता के सपने और उम्मीदें भी इसके साथ जुड़ी होती हैं इसलिए इन उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए अपने लक्ष्य की ओर अग्रसहित होने के लिये उन्हें शुभकामनाऐं दीं।

संस्थान की वाइस चेयरपर्सन डाॅ॰ मोनिका अग्रवाल ने कहा कि डाॅक्टर को इस धरती पर भगवान का दर्जा दिया गया है क्योंकि डाॅक्टर अनेक गंभीर बीमारियों से निवारण कर हमें नया जीवन प्रदान करते हैं इसलिए पूर्णतः लगन से पढ़ाई करें जिससे इस समाज को एक कुशल डाॅक्टर का नेतृत्व प्राप्त हो।

मैनेजिंग डायरेक्टर श्री रोहन बंसल ने कहा कि आज आपके कंधों पर जो सफेद कोट है, वो सिर्फ वर्दी नहीं है। ये आपसे हर दिन एक सवाल पूछेगी- “क्या तुमने मरीज को सिर्फ केस माना, या इंसान समझा?”
उन्होनें एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ साल पहले, एक वरिष्ठ डॉक्टर ने मुझे बताया-आईसीयू में एक गंभीर मरीज को भर्ती किया गया था। सारी ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के हिसाब से चल रही थी, लेकिन मरीज बहुत चिंतित था। डॉक्टर ने बस 30 सेकंड निकाले, मरीज के पास बैठ कर कहा कि आप फिक्र मत कीजिए, हम आपके साथ हैं।” इतना सुनते ही मरीज ने कहा- डॉक्टर साहब, दवा से पहले मुझे आपके शब्द से हिम्मत मिली।
इस घटना से यह शिक्षा मिलती है कि मरीजों को भले ही हर दवा याद न हो, लेकिन वे आश्वासन कभी नहीं भूलते।
उन्होनें बताया कि मेडिसिन आपको ज्ञान देगी, मशीनें और प्रोटोकॉल सिखायेगी। लेकिन दबाव में शांत रहना, सही निर्णय लेना, और मरीज को उम्मीद देना- ये सिर्फ एक प्रतिबद्ध डॉक्टर ही कर सकता है। मैं चाहता हूँ कि यहां से निकला हर डॉक्टर आत्मविश्वास के साथ विनम्रता, और अधिकार के साथ करुणा लेकर निकले और जब भी आप थकें या दबाव महसूस करें तो बस एक सेकंड रुक कर अपने आप से पूछें! “क्या मैं आज भी अपनी शपथ के साथ ईमानदार हूँ?”
इस अवसर पर बोलते हुए संस्थान की ऐकेडमिक एडवाइजर मिस तूलिका अग्रवाल ने छात्र/छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सक बनाना लाखों लोगों का सपना होता है, लेकिन कुछ ही बन पाते हैं, इसके लिए आपके अभिभावकों ने कितने प्रयास किए होंगे, जिसके बाद आप आज यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि व्हाइट कोट पहनने के साथ ही आप पर एक जिम्मेदारी भी शुरू हो जाती है। उन्होने यह भी कहा कि आपको अपने आप में सबसे बेस्ट बनना है, इसके लिए आज से ही प्रयास शुरू करें एवं जीवन में आगे बढें।
समारोह का संचालन डाॅ॰ अमिता परदेशी एवं डाॅ॰ प्रियंका मिश्रा ने किया।
समारोह में संस्थान के चेयरमैन श्री राजेन्द्र अग्रवाल, सेक्रेटरी श्री राकेश अग्रवाल, वाइस चेयरपर्सन डाॅ॰ मोनिका अग्रवाल, मैनेजिंग डायरेक्टर श्री रोहन बंसल, सी0ओ0ओ0 श्री ऋषभ बंसल, एकेडमिक एडवाइजर श्रीमती तूलिका अग्रवाल, ट्रस्टी श्री अजय कुमार अग्रवाल, संस्थान के डीन डाॅ0 वी0के0 अग्रवाल तथा मेडिकल सुपरिटेन्डेन्ट डा0 डब्लू॰पी॰ सिंह सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर एवं अध्यापकगण उपस्थित रहे।